बजट 2026-27: नई बोतल में पुरानी शराब?
विश्लेषण | आर्थिक बजट
केंद्रीय बजट 2026-27 को यदि समग्र रूप से देखा जाए तो यह पिछले बजट की ही पुनरावृत्ति प्रतीत होता है। इसमें “विकसित भारत” की संकल्पना को एक बार फिर दोहराया गया है तथा समावेशन के साथ महत्वाकांक्षा के संतुलन पर ज़ोर दिया गया है। बजट का घोषित उद्देश्य आकांक्षाओं को उपलब्धियों में रूपांतरित करना और क्षमताओं को प्रदर्शन में बदलना है।
इस बजट में एक बार फिर आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को केंद्र में रखा गया है, जिसके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। सरकार ने इस बजट को युवा शक्ति को समर्पित बताते हुए कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी है।
बजट में किसान, महिला, दलित, वंचित, शोषित, पीड़ित एवं पिछड़े वर्गों के कल्याण पर विशेष फोकस किया गया है। सरकार ने अपने दायित्वों को तीन प्रमुख कर्तव्यों में विभाजित किया है—
पहला, आर्थिक विकास को गति देना और उसे टिकाऊ बनाना;
दूसरा, नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करना;
और तीसरा, सबका साथ–सबका विकास के संकल्प को साकार करना।
शिक्षा क्षेत्र में प्रत्येक जिले में उच्च शिक्षा के एसटीईएम (STEM) संस्थानों में गर्ल्स हॉस्टल, युवा कौशल केंद्र और आवासीय सुविधाओं की घोषणा एक सराहनीय पहल मानी जा सकती है। इसके अतिरिक्त महात्मा गांधी के नाम पर महात्मा गांधी स्वराज रोजगार योजना का उल्लेख किया गया है।
कृषि क्षेत्र में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को पुनः दोहराया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत ऋण सीमा को आगामी वित्तीय वर्ष से तीन लाख से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये करने की घोषणा की गई है। साथ ही किसानों के लिए कृषि एआई (AI) प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिससे उन्हें समय पर कृषि संबंधी सूचनाएं प्राप्त हो सकेंगी।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को सशक्त बनाने के लिए त्रि-आयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें इक्विटी सहायता, पेशेवर मार्गदर्शन तथा व्यापार के माध्यम से नकदी सहायता शामिल है। बजट में अवसंरचना विकास, आयात पर निर्भरता कम करने, निर्यात बढ़ाने और सेवा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने पर भी बल दिया गया है।
हालांकि इन सभी घोषणाओं के बावजूद, समग्र मूल्यांकन में यह बजट किसी ठोस नवाचार के बजाय पिछली नीतियों और घोषणाओं की पुनरावृत्ति अधिक प्रतीत होता है। नए विचारों और क्रांतिकारी सुधारों की अपेक्षा रखने वालों के लिए यह बजट अपेक्षाकृत साधारण रहा है।
✍️ लेखक
डॉ. मनमोहन लाल विश्वकर्मा
असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष
अर्थशास्त्र विभाग
गांधी शताब्दी स्मारक स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
कोयलसा, आज़मगढ़
