राम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है – आचार्य राहुल शास्त्री
आजमगढ़।
आजमगढ़–बिलरियागंज रोड स्थित पटवध कौतुक के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा व्यास आचार्य राहुल शास्त्री महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि मृत्यु लोक में तीन वस्तुएँ परम दुर्लभ हैं, जो केवल ईश्वर की कृपा से ही प्राप्त होती हैं—
मनुष्य जन्म, मुक्ति की इच्छा और महापुरुषों का सानिध्य।
ये तीनों देव अनुग्रह से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि मनुष्य जन्म अपने आप में अनमोल है, किंतु यदि जीवन में मुक्ति की कामना जागृत हो जाए और संत-महापुरुषों का संग मिल जाए, तो समझना चाहिए कि ईश्वर की विशेष कृपा हो चुकी है।
आचार्य ने उदाहरण देते हुए बताया कि लंका में जब विभीषण को पवनपुत्र हनुमान का सानिध्य प्राप्त हुआ, तो अंततः उन्हें भगवान राम के चरणों की प्राप्ति हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभीषण जीवात्मा का प्रतीक हैं, हनुमान महात्मा के स्वरूप हैं और रघुनाथ परमात्मा हैं। जब जीवात्मा को महात्मा का संग मिलता है, तो वह परमात्मा से मिलन की ओर अग्रसर हो जाती है।
आचार्य राहुल शास्त्री जी महाराज ने कहा कि राम कथा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है, जबकि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा हमें मृत्यु को भी उत्सव की तरह स्वीकार करना सिखाती है। इसलिए जीवन में सत्संग का अत्यंत महत्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं से समय-समय पर भगवान श्रीराम की कथा का श्रवण करने तथा अपने घरों में नित्य रामचरितमानस का पाठ करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर पंजाब ट्रैक्टर के डायरेक्टर राणा बलबीर सिंह तथा बानर सेना अध्यक्ष आचार्य श्रीकांत पांडे जी ,पंडित अखंड प्रताप दुबे सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
