*तीन साल में पांच आदेश, फिर भी नहीं हटा तालाब पर कब्जा — पीड़ित ने राजस्व विभाग पर लगाया मिलीभगत का आरोप Khabar Manch
तहसील सगड़ी क्षेत्र के ग्राम पिपरहा दुखियावर में ग्राम समाज के सार्वजनिक तालाब पर कथित अतिक्रमण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गांव निवासी अश्वनी सिंह राठौर ने आरोप लगाया है कि उनके घर के सामने स्थित ग्राम समाज का सार्वजनिक तालाब (गाटा संख्या 461) पिछले लगभग 30 वर्षों से पड़ोसी रवींद्र सिंह और उनके परिवार द्वारा कब्जा कर लिया गया है। आरोप है कि लगभग एक बीघा भूमि पर मिट्टी डालकर अवैध निर्माण भी कर लिया गया है और अभी भी निर्माण कार्य जारी है।पीड़ित के अनुसार तीन वर्ष पहले मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने के बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था और तब से लगातार इसकी पैरवी की जा रही है। इस दौरान तहसीलदार कोर्ट, मुख्य राजस्व अधिकारी तथा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद तक से अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी हो चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक तालाब की भूमि से कब्जा नहीं हटाया गया।आवेदक का आरोप है कि भूमाफिया के दामाद विपिन सिंह तहसील सगड़ी में लेखपाल के पद पर कार्यरत हैं और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पूरे मामले को प्रभावित कर रहे हैं। उनके अनुसार इसी कारण राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई करने से बचते रहे हैं।बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों में अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व विभाग द्वारा तीन बार टीम का गठन किया गया, लेकिन हर बार निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और बाद में विभाग की ओर से अलग-अलग कारण बताते हुए रिपोर्ट लगा दी गई।हाल ही में CPGRAM पोर्टल के माध्यम से दोबारा शिकायत करने पर 17 फरवरी 2026 को फिर से अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व टीम का गठन किया गया था और 15 दिनों के भीतर कार्रवाई का समय तय किया गया था। लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया।पीड़ित अश्वनी सिंह राठौर ने बताया कि पिछले सप्ताह उन्होंने सभी दस्तावेजों के साथ जिलाधिकारी और कमिश्नर से मुलाकात की थी। कमिश्नर ने तहसील सगड़ी के एसडीएम को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन अतिक्रमण हटाने के बजाय तालाब की दोबारा पैमाइश कर उसे आबादी की जमीन बताने की कोशिश की गई। हालांकि गांव वालों के विरोध के बाद टीम बिना किसी निष्कर्ष के वापस लौट गई।गांव में इस मामले को लेकर माहौल तनावपूर्ण बताया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि उसे मामले को वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और धमकियां भी मिल रही हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उच्च न्यायालय और राजस्व न्यायालयों के आदेशों का पालन कराते हुए सार्वजनिक तालाब से अतिक्रमण हटाया जाए और दोषी अधिकारियों तथा भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। Desk report khabar Manch

